Shri Shiv Tandava Stotram Lyrics in Hindi – अर्थ, महत्त्व और सम्पूर्ण स्तोत्र

Shri Shiv Tandava Stotram Lyrics in Hindi | सम्पूर्ण पाठ, अर्थ और महत्त्व ।
शिव तांडव स्तोत्र के सम्पूर्ण हिंदी लिरिक्स, अर्थ, महत्त्व, पाठ विधि और लाभ जानें। भगवान शिव की महिमा का अद्भुत स्तोत्र पढ़ें।

Shri Shiv Tandava Stotram Lyrics in Hindi:
भगवान शिव की स्तुति में रचित शिव तांडव स्तोत्र सबसे शक्तिशाली और लोकप्रिय स्तोत्रों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि इसकी रचना लंकापति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए की थी। इस स्तोत्र में शिवजी के विराट स्वरूप, तांडव नृत्य और उनकी दिव्य शक्ति का अद्भुत वर्णन मिलता है।

श्रावण मास, महाशिवरात्रि तथा दैनिक शिव पूजा के दौरान लाखों श्रद्धालु शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करते हैं।

शिव तांडव स्तोत्र किसने लिखा था?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब रावण ने कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास किया तो भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को दबा दिया। रावण पर्वत के नीचे फंस गया। तब उसने भगवान शिव की स्तुति में यह दिव्य स्तोत्र गाया, जिसे आज शिव तांडव स्तोत्र के नाम से जाना जाता है।

Shri Shiv Tandava Stotram Lyrics (संस्कृत)

॥ शिव ताण्डव स्तोत्रम् ॥

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥
जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी-
विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम॥
धराधरेन्द्रनन्दिनीविलासबन्धुबन्धुर-
स्फुरद्दिगन्तसन्ततिप्रमोदमानमानसे।
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि
क्वचिद्दिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि॥
जटाभुजङ्गपिङ्गलस्फुरत्फणामणिप्रभा
कदम्बकुङ्कुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे।
मदान्धसिन्धुरस्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि॥
सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर-
प्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः।
भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटकः
श्रिये चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः॥
ललाटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फुलिङ्गभा-
निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम्।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं
महाकपालिसम्पदेशिरोजटालमस्तु नः॥
करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनञ्जयाहुतीकृतप्रचण्डपञ्चसायके।
धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम॥
नवीनमेघमण्डली निरुद्धदुर्धरस्फुरत्
कुहूनिशीथिनीतमः प्रबन्धबद्धकन्धरः।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः
कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरन्धरः॥
प्रफुल्लनीलपङ्कजप्रपञ्चकालिमप्रभा-
वलम्बिकण्ठकन्दलीरुचिप्रबद्धकन्धरम्।
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदान्धकच्छिदं तमन्तकच्छिदं भजे॥
अखर्वसर्वमङ्गलाकलाकदम्बमञ्जरी-
रसप्रवाहमाधुरीविजृम्भणामधुव्रतम्।
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं
गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे॥
जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजङ्गमश्वस-
द्विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालभालहव्यवाट्।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल-
ध्वनिक्रमप्रवर्तितप्रचण्डताण्डवः शिवः॥
शिव तांडव स्तोत्र का सरल अर्थ
शिव तांडव स्तोत्र में भगवान शिव के रौद्र और कल्याणकारी दोनों स्वरूपों का वर्णन किया गया है।
शिवजी की जटाओं से बहती गंगा का वर्णन।
उनके गले में विराजमान नागों की महिमा।
तांडव नृत्य की दिव्य ऊर्जा।
त्रिनेत्रधारी शिव का तेजस्वी स्वरूप।
संसार के दुखों का नाश करने वाली उनकी कृपा।
यह स्तोत्र हमें बताता है कि विनाश और सृजन दोनों ही ईश्वर की दिव्य लीला का हिस्सा हैं।
शिव तांडव स्तोत्र पढ़ने के लाभ
1. मानसिक शांति प्राप्त होती है
नियमित पाठ मन को स्थिर और शांत बनाता है।
2. नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
भक्तों का विश्वास है कि इसका पाठ घर और जीवन की नकारात्मकता को दूर करता है।
3. आत्मविश्वास बढ़ता है
इस स्तोत्र की ऊर्जावान ध्वनि व्यक्ति के आत्मबल को मजबूत करती है।
4. भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है
श्रद्धा और भक्ति से किया गया पाठ शिवजी का आशीर्वाद दिलाता है।
5. आध्यात्मिक उन्नति में सहायक
यह स्तोत्र ध्यान और साधना के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
शिव तांडव स्तोत्र पढ़ने की सही विधि
प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान शिव के समक्ष दीपक और धूप जलाएं।
"ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करें।
श्रद्धा और एकाग्रता से शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।
अंत में भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना करें।
महाशिवरात्रि और सावन में विशेष महत्त्व
महाशिवरात्रि, श्रावण मास और सोमवार के दिन शिव तांडव स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। इन दिनों भक्त बड़ी संख्या में शिव मंदिरों में जाकर इस स्तोत्र का पाठ करते हैं।
निष्कर्ष
श्री शिव तांडव स्तोत्र केवल एक स्तुति नहीं बल्कि भगवान शिव की अनंत शक्ति, करुणा और दिव्यता का अद्भुत वर्णन है। इसका नियमित पाठ मन में साहस, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है। यदि आप भगवान शिव के भक्त हैं तो इस स्तोत्र को अपनी दैनिक पूजा में अवश्य शामिल करें।

FAQs

Q1. शिव तांडव स्तोत्र किसने लिखा था?
मान्यता के अनुसार इसकी रचना लंकापति रावण ने भगवान शिव की स्तुति में की थी।
Q2. शिव तांडव स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए?
प्रातःकाल, संध्याकाल, सोमवार, सावन और महाशिवरात्रि के दिन इसका पाठ विशेष लाभकारी माना जाता है।
Q3. क्या महिलाएं शिव तांडव स्तोत्र का पाठ कर सकती हैं?
हाँ, कोई भी श्रद्धालु स्त्री या पुरुष इसका पाठ कर सकता है।
Q4. शिव तांडव स्तोत्र पढ़ने से क्या लाभ होता है?
मानसिक शांति, आत्मविश्वास, सकारात्मक ऊर्जा और शिव कृपा की प्राप्ति होती है।
Q5. शिव तांडव स्तोत्र और शिव चालीसा में क्या अंतर है?
शिव तांडव स्तोत्र संस्कृत में रचित एक स्तुति है जबकि शिव चालीसा सरल हिंदी में भगवान शिव की महिमा का वर्णन करती है।


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